वृंदावन एक आध्यात्मिक जगह होने के साथ-साथ एक टूरिस्ट पैलेस भी बन चुका है। करोड़ों की संख्या में हर साल यहां भीड़ आती है। आज से 5 साल पहले वृंदावन में बहुत कम लोग आते थे लोगों की संख्या इतना काम होता था कि आप किसी भी मंदिर में किसी भी समय दर्शन कर सकते थे बिना किसी झंझट के लेकिन आज के समय में मंदिर बिना लाइन में लगे आप किसी भी मंदिर में दर्शन नहीं कर पाते हैं क्योंकि अब वृंदावन के अंदर करोड़ों लोगों की भीड़ आने लगी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यहां आज से 5 या 6 साल पहले सिर्फ भक्त आया करते थे लेकिन अब वृंदावन के अंदर ऐसे भी लोग आते हैं जिनके अंदर भक्ति नहीं है वह सिर्फ घूमने के लिए आते हैं मतलब वृंदावन एक आध्यात्मिक जगह भक्तों के लिए है और एक टूरिस्ट पैलेस उन लोगों के लिए है जिन्हें अध्यात्म से कोई मतलब नहीं है। पहले की अपेक्षा वृंदावन में भी अभी बहुत बदलाव हुआ है अगर आप एक भक्त है और आप वृंदावन के अंदर आते हैं तो हो सकता है की आप कुछ जगहों की व्यवस्था देखकर थोड़े से नाराज हो जाए। वृंदावन जब से टूरिस्ट पैलेस बना है तब से बहुत सारे जगह से लोग आकर वृंदावन के अंदर ऑटो चला रहे हैं या और भी बहुत सारे काम कर रहे हैं उन लोगों का व्यवहार वृंदावन में भक्तों के प्रति बहुत अच्छा नहीं होता है।
लेकिन वही जब आप किसी भी बृजवासी से मिलते हैं तो उनका व्यवहार आपको एक अलग ही नजर आएगा। बृजवासी पूरे बज के जान होते हैं उन्हीं के वजह से यह पूरा ब्रिज टिका हुआ है। लेकिन जब से ब्रज में बाहरी लोग आकर के धंधा करना चालू किए हैं तब से बहुत सारे लोगों का अनुभव यह बताता है कि उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ है। क्योंकि जब आप किसी भी ऑटो पर बैठते हैं और उन्हें ऐसा लगता है कि आपको इस जगह के बारे में सही से जानकारी नहीं है तो वह आपसे ज्यादा पैसे चार्ज करते हैं।
वृंदावन भगवान का घर है और भगवान के घर में जब उनके भक्त आते हैं तो उनके मन में एक अलग ही विचार होता है लेकिन जब उसे जगह पर ऐसे लोग उन भक्तों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो उनका दिल जरूर टूटता है। क्योंकि एक भक्त के लिए भगवान ही उसका सब कुछ होते हैं इसलिए जो भक्त यहां आए होते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार होता है तो वह किसी को भी दोस्ती नहीं मानते हैं तो चुपचाप चले जाते हैं।
तो एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए की वृंदावन में आप आते हैं तो ऑटो वालों से या फिर बंदरों से या और जो ऐसे लोग हैं जो सिर्फ भक्तों को या टूरिस्ट को लूटना चाहते हैं उनसे बचना चाहिए। ऑटो वाले जो किराया मांगते हैं वह दोगुना मांगते हैं आप उनको आदि किराए पर मनाओ और उसे आदि किराए पर आप ट्रैवल करो।
आप वृंदावन के अंदर किसी होटल में रुकने के बजाय किसी धर्मशाला में रखिए क्योंकि वहां आपको खाने के लिए भी फ्री में मिल जाता है। क्योंकि अगर आप किसी होटल में रखेंगे तो आपको किसी न किसी रेस्टोरेंट में खाना पड़ेगा और रेस्टोरेंट में खाने के लिए आपको बहुत ज्यादा पैसे देना पड़ेगा।




